धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि बृज के एक संत हुए, वे कहते थे कि राम जी तो मिट्टी की मूर्ति हैं. क्या वे मिट्टी की मूर्ति हैं. भाव में हमने कहा था. फिर भी हमारी भावना ऐसी नहीं थी. हम खुद ठाकुर जी के भक्त हैं. इस दौरान वह हाथ जोड़कर माफी मांगने की मुद्रा में भी नजर आए.'